Wednesday, February 22, 2017

इक शाम ऐसी हो..

इक शाम ऐसी हो,

तुम हो, मैं होऊं, और कोई न हो
नई चाहतें हो, कईं राहतें हो, कोई आहतें न हो,
खुला आकाश हो, प्रेम-विन्यास हो, कोई कयास न हो,
हाथ में हाथ हो, इक-दूजे का साथ हो, कोई बात न हो,
मचलते अरमाँ हो, बरसता समाँ हो, कोई तूफ़ाँ न हो,

इक शाम ऐसी हो..
करवटें हों, सिलवटें हों, कोई आहटें न हो
ज़िन्दगी हो, दिलकशी हो, कोई गमनशीं न हो
दीवानगी हों, तिश्नगी हो, कोई दिलठगी न हो
पूरी मन्नतें हों, नई जन्नतें हों, कोई जिल्लतें न हो
हाँ बस तुम हो, मैं होऊं और कोई न हों..

इक शाम ऐसी हो...