Tuesday, December 4, 2018

पुस्तक समीक्षा : अतिप्रभावकारी लोगों की 7 आदतें

..और स्टीफन रिचर्ड्स कवी की पुस्तक 'अतिप्रभावकारी लोगों की 7 आदतें' समाप्त की। यह पुस्तक The 7 Habits of Highly Effective People का हिंदी संस्करण है। यह पुस्तक मेरे संग्रह में तब से है जब मुझे किताबों का बिलकुल भी शौक नहीं था। हाल ही में इसे इत्मीनान से पढ़ने का भरपूर समय और अवसर मिला। हाल ही में इसके लेखक स्टीफन, जो कि एक साईक्लिस्ट भी थे, अप्रैल 2012 में अमेरिका में उताह स्थित, रॉक केन्यन पार्क में एक पहाड़ी से बाईक दुर्घटना में गिरने, गंभीर चोटिल होने और बाद में उक्त दुर्घटना से बिगड़ती शारीरिक स्थिति के कारण 16 जुलाई 2012 को उनके निधन हो जाने से विश्वभर में चर्चा में आ गए और उनकी पुस्तकों को भी याद किया गया।

चलिये, अब पुस्तक की बात करते हैं। सबसे पहले तो ये बता ही देना चाहूँगा कि यह एक शानदार और बेहतरीन पुस्तक है। अवसर निकालकर मुझे इसे काफी पहले ही पढ़ लेना चाहिए था। 'सेल्फ-हेल्प' श्रेणी में हर साल अनेकों पुस्तकें छपती है, किन्तु विरले ही कोई सही मायने में प्रभावकारी हो पाती है। 'अतिप्रभावकारी लोगों की 7 आदतें' इस मामले में ऐसी ही एक बेहतरीन पुस्तक है जो अपने नाम की तरह ही वास्तव में प्रभावकारी है। साथ ही यह प्रेरक, व्यावहारिक और रोमांचक भी है। इस पुस्तक को पढ़ने का मेरा अपना अनुभव एकदम अलग था। एक समय था जब मैं 150 से 200 पेज की पुस्तक को पूरा करने में भी महीना लगा देता था क्योंकि पेज और शब्द-सीमा देखकर ही अक्सर पढ़ते-पढ़ते बाद में, अगली बार कभी पढ़ने का इरादा आ जाया करता था और पुस्तक धरी रह जाती थी। ऐसे में 450 से भी अधिक पेज की यह पुस्तक पढ़ना शुरू करने में ही मैंने इतना अरसा निकाल दिया। किन्तु जब इसे शुरू किया, यह धीरे-धीरे दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनती गई। देखते ही देखते मैंने इसे 15 ही दिनों में पढ़ डाला। इसी से इसका ज़ायका कैसा है, यह अनुमान लगाया जा सकता है।

यह पुस्तक चार मुख्य भागों में विभाजित है:
1- पैरेडाइम्स और सिद्धांत : यहाँ अपने सबसे अंदरूनी हिस्से यानि अपने पैरेडाइम, अपने चरित्र और अपने उद्देश्यों से शुरुआत करने की बात की गई है। यहाँ संक्षिप्त में सातों आदतों का ब्यौरा दिया गया है, मसलन: प्रोएक्टिव बनें, अंत को ध्यान में रखकर शुरू करें, पहली चीज़ें पहले रखें, जीत/जीत सोचें, पहले समझने की कोशिश करें फिर समझे जाने की, सिनर्जी का प्रयोग करें और आरी की धर तेज करें। इन्हें पुस्तक के बाकि तीनों भागों में बांटकर विस्तृत रूप से बताया गया है।

2- व्यक्तिगत विजय : पहली तीन आदतों के साथ बताया गया है कि हमारा व्यवहार सिद्धांतों द्वारा संचालित होता है। इनके सामंजस्य में जीने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, इनका उल्लंघन करने से नकारात्मक परिणाम मिलते हैं। किसी भी स्तिथि में हम अपनी प्रतिक्रिया चुनने के लिए स्वतन्त्र हैं, परन्तु ऐसा करते समय हम उसके परिणाम को भी चुनते हैं। हमारे जीवनमूल्य और दिशाएँ स्पष्ट होने चाहिए। इसका अर्थ है अपनी स्क्रिप्ट दोबारा लिखना ताकि हमारे व्यवहार और दृष्टिकोण को उत्पन्न करने वाले पैरेडाइम्स हमारे गहनतम जीवनमूल्यों से मेल खाएँ और सही सिद्धांतों के तारतम्य में हों। एक व्यक्तिगत मिशन स्टेटमेंट तैयार किया जाये, जिसका फोकस इस बात पर हो कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं। आप अपने व्यक्तिगत मिशन स्टेटमेंट को व्यक्तिगत संविधान कह सकते हैं। इसके अलावा हम अत्यावश्यक मामलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। चीजों और कामों को प्राथमिकताएँ देने सम्बन्धी विषय पर विशेष अध्याय लिखा गया है।

3- सार्वजनिक विजय : यहाँ चौथी, पाँचवीं और छठी आदतों के तहत बताया गया है कि जीत/जीत जीवन को प्रतियोगी क्षेत्र के रूप में न देखकर सहयोगी क्षेत्र के रूप में देखती है। यह मानवीय व्यवहार का सम्पूर्ण पैरेडाइम है। साथ ही परानुभुतिपूर्वक सुनने (अर्थात समझने के इरादे से सुनना) की योग्यता का चरित्र की नींव पर निर्माण करने की बात कही गई है। इसके अलावा सिनर्जी अर्थात कोई चीज़ अपने हिस्सों के योगफल से कैसे बड़ी होती है सुन्दरता के साथ बतलाया गया है। इसका मतलब है हिस्सों का एक-दूसरे के साथ जो सम्बन्ध है वह भी एक हिस्सा है और यह सिर्फ हिस्सा ही नहीं है, बल्कि सबसे उत्प्रेरक, सबसे शक्तिदायी, सबसे एकात्मक और सबसे रोमांचक हिस्सा है। सिनर्जी प्रकृति में चारों ओर है। अगर आप दो पौधों को नजदीक लगा दें, तो उनकी जड़ें आपस में मिल जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता को सुधार देती है, ताकि दोनों पौधे उससे बेहतर बढ़ सकें, जितना वे अलग-अलग बढ़ सकते थे। सिनर्जी का सार मतभिन्नताओं को महत्त्व देना हैं, शक्तियों को बढ़ाना है, कमजोरियों की भरपाई करना है।

4- नवीनीकरण : यहाँ सातवीं आदत के तहत आपकी सबसे बड़ी संपत्ति यानि आप 'स्वयं' को, आपके स्वभाव के चारों आयामों - शारीरिक, आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक/भावनात्मक के नवीनीकरण द्वारा सुरक्षित रखना और विकसित करना बताया गया है।

और इस तरह कुल मिलाकर यह वास्तव में व्यक्तिगत प्रभावकारिता में सुधार लाने के मामले में बेहतरीन पुस्तक है। यह बहुत कुछ नया बताती है जो हम या तो जानते ही नहीं या जानते हुए भी दृष्टिकोण के यहाँ दर्शाए गए सुन्दर और असरदार ढंग से देख और समझ पाने में असमर्थ रहे। व्यक्तिगत विकास की अनेकानेक पुस्तकों में 'अतिप्रभावकारी लोगों की 7 आदतें' अपना एक अलग स्थान पाती है। यह विस्तृत मनोविज्ञान की एक सारगर्भित पुस्तक है। यह पुस्तक हर उस शख्स के लिए है जो स्वयं के जीवन और जीवनमूल्यों में सिद्धांत-केन्द्रित दृष्टिकोण के साथ आत्मविकास, प्रभावकारिता और आत्मप्रेरण लाने का अवसर पाना चाहते हों। कहीं-कहीं भाषा कुछ गूढ़ भी हो चलती है लेकिन सम्पूर्ण पुस्तक पढ़ डालने के बाद आप इसे सरल ही कहना चाहेंगे।

और आखिर में...

"जब मैं महान लोगों की समाधियों को देखता हूँ, तो मेरे अन्दर ईर्ष्या का हर भाव मर जाता है। जब मैं सुन्दर लोगों के समाधि-लेख पढ़ता हूँ, तो मेरी हर प्रबल इच्छा बाहर हो जाती है। जब पुत्र की समाधि के पत्थर पर माता-पिता के दुःख से मेरा सामना होता है, तो मेरा ह्रदय करुणा से भर उठता है। जब मैं स्वयं माता-पिता की समाधि देखता हूँ, तो मैं उन लोगों के लिए शोक मनाने की निरर्थकता पर विचार करता हूँ, जिनके पीछे हम भी जल्दी ही चले जायेंगे। जब मैं सम्राटों को उन लोगों के पास लेटे देखता हूँ, जिन्होंने उन्हें गद्दी से हटाया था; जब मैं  शत्रु विद्वानों को पास-पास बनी कब्रों में देखता हूँ या उन धार्मिक व्यक्तियों को एक-दूसरे के निकट दफ़न देखता हूँ, जिन्होंने अपने विवादों से विश्व को विभाजित किया था, तो मैं मानवजाति की छोटी-छोटी प्रतिस्पर्धाओं, गुटबंदियों और विवादों पर विचार करते हुए दुःख और आश्चर्य से भर जाता हूँ। जब मैं लोगों की समाधियों पर लिखी मृत्यु की अलग-अलग तारीखें पढ़ता हूँ, जिनमें से कुछ कल की होती हैं और कुछ छः सौ साल पहले की, तो मैं उस महान दिन के बारे में सोचता हूँ ,जब हम सब समकालीन होंगे और एक साथ नज़र आयेंगे।"


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